Sunday, October 14, 2018

और बेटे को गोली मारने वाले गनर ने पहले से की थी 'प्‍लानिंग', फेसबुक से हुआ ये खुलासा

निजी सुरक्षा गार्ड के कथित रूप से गोली मारने के बाद घायल हुई एक न्यायाधीश की पत्नी की मौत हो गई है, जबकि उनके 18 वर्षीय पुत्र को ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया गया है. अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कृष्ण कांत की पत्नी रितु (45) और पुत्र ध्रुव (18) शनिवार को आर्केडिया मार्केट में खरीदारी के लिए गये थे.  उसी दौरान उनके निजी सुरक्षा गार्ड महिपाल ने उन्हें गोली मार दी. दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया. वहीं पुलिस को जांच के दौरान महिपाल का फेसबुक पोस्‍ट मिला है जिसे उसने 12 अक्‍टूबर को लिखी पोस्‍ट में इस हत्‍याकांड की आरोपी महिपाल ने वारदात के एक दिन पहले अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्‍ट शेयर किया है. इसमें एक पेज पर ऊपर पस्तोर रॉबिन्स लिखा है और नीचे एक लाइन खींची है जिसमें डॉट बने हैं और नीचे 4 डॉट हैं उनमें दो के सामने कोई नाम लिखा है जो काट दिए हैं, जो नाम कटे वो उनके आगे D और R तो है. जैसे पत्नी का नाम ऋतु और बेटे का ध्रुव है, लेकिन पूरा नाम समझ नहीं आ रहा है्. ये क्या है इसकी भी जांच चल है. जांच में ये भी पता चली है कि महि

पाल ईसाई धर्म को फॉलो कर रहा था. वो इस धर्म को फॉलो करने वाले कुछ लोगों के संपर्क में भी था. इन सब को लेकर जांच चल रही है लेकिन अभी वारदात का मोटिव साफ नहीं हो सका है. वहीं गुरुग्राम सिविल अस्पताल के क्षेत्रीय चिकित्सा अधिकारी पवन चौधरी ने रितु की मौत होने की पुष्टि की है और कहा कि उनके शव का पोस्टमार्टम कराया गया है. चौधरी ने बताया, ‘रितु की मौत की वजह अत्यंत रक्तस्राव था.  तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों के एक पैनल ने छाती के दाहिने ओर और बीच में गोली के दो घाव पाये. ’ चिकित्साधिकारी ने कहा कि ध्रुव को सिर में गोली मारी गई थी, वह ब्रेन डेड हो गया है.  उसे जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है. यदि वह बच जाता है तो वह चमत्कार होगा. इस बीच.

 महिपाल को दोपहर एक बजे गुरुग्राम की एक अदालत में लाया गया, जिसने उसे चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया. गुड़गांव पुलिस ने यह पता लगाने के लिए कि उपुलिस ने बताया कि बाद में वे एक कार में फरार हो गए जिससे वे स्कूल में आए थे. एक खुफिया सूचना के आधार पर गिरोह के एक सदस्य को बाद में महालक्ष्मी इलाके से पकड़ लिया गया. उसने पुलिस पर हमला किया जिसके बाद पुलिस की गोली से उसके पैर में चोट आई. बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया और इलाज किया गया.  पुलिस को संदेह है कि इस हत्या के पीछे स्कूल की इमारत से जुड़ा भूमि विवाद वजह हो सकता है. सने रितु और ध्रुव को गोली क्यों मारी, उसकी एक सप्ताह की हिरासत मांगी थी. पुलिस ने मामले की सभी कोणों से जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया है. जांच टीम से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिपाल लगातार अपने बयान बदल रहा है और सवाल पूछे जाने पर वह गुस्सा हो जाता है.  वह अपनी निजी, पारिवारिक समस्या को लेकर अवसाद में है.  पहले से योजना बना ली थी. 
 
बेंगलुरु में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक स्कूल के प्रिंसिपल की 20 छात्रों के सामने ही निर्मम तरीके से धारदार हथियार से हत्या कर दी गई. घटना के समय प्रधानाचार्य कक्षा में पढ़ा रहे थे और इसी दौरान छह लोगों के गिरोह ने उन पर हमला कर दिया. पुलिस के मुताबिक अग्रहारा दसरहल्ली उपनगर में हवानुर पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य रंगनाथ (60) 10वीं के छात्रों को पढ़ा रहे थे. तभी गिरोह कक्षा में घुसा और उनकी धारदार हथियार से हत्या कर दी.नई दिल्ली: गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (   ) में नाम दर्ज करवाने की खातिर महाराष्ट्र के शेफ विष्णु मनोहर ने रविवार को नागपुर में एक ही कड़ाही में 3,000 किलोग्राम खिचड़ी बनाई. 16 अक्टूबर को 'वर्ल्ड फूड डे' से पहले ही खिचड़ी का यह रिकॉर्ड बनाने वाले शेफ विष्णु मनोहर ने समाचार एजेंसी ANI से कहा, "मैं वर्ल्ड रिकॉर्ड की कोशिश कर रहा हूं, और इसके पीछे मेरी ख्वाहिश है कि खिचड़ी को राष्ट्रीय व्यंजन घोषित किया जाए... 

यह सबसे ज़्यादा स्वास्थ्यवर्द्धक और किफायती व्यंजन है..."वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की ख्वाहिश में बनाई गई खिचड़ी के लिए विष्णु मनोहर ने 275 किलोग्राम चावल, 125 किलोग्राम मूंग की दाल, 150 किलोग्राम चने की दाल, 150 किलोग्राम मक्खन तथा 3,000 लीटर पानी का इस्तेमाल किया.केंद्रीय सड़क परिवहन तथा राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इस आयोजन के दौरान उपस्थित थे, और उन्होंने शेफ विष्णु मनोहर को उनके इस प्रयास के लिए बधाई दी. पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा, "वह जाने-माने शेफ हैं, और मैं उनके इस रिकॉर्ड के लिए उन्हें बधाई देता हूं... वह भारतीय व्यंजन को दुनियाभर में मशहूर कर रहे हैं, और इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं... उन्होंने बहुत महान काम किया है... जो खिचड़ी उन्होंने बनाई थी, वह मसाला खिचड़ी थी, और बहुत स्वादिष्ट थी..." पिछले साल नवंबर में भारत ने 'चावल और फलियों की सबसे बड़ी सर्विंग' तैयार करने के लिए गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करवाया था, जब नई दिल्ली में 918 किलोग्राम खिचड़ी बनाई गई थी. उस वक्त यह खिचड़ी जाने-माने शेफ संजीव कपूर ने बनाई थी.

Monday, October 8, 2018

#MeToo फ़िल्मकार विकास बहल पर यौन हमले का आरोप, अनुराग कश्यप ने मानी ग़लती

वीन' फ़िल्म के निर्देशक विकास बहल, लोकप्रिय लेखक चेतन भगत और टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पूर्व कार्यकारी संपादक गौतम अधिकारी पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं.
शनिवार को फ़िल्म, मीडिया और इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़ी हस्तियों पर लगे यौन प्रताड़ना के आरोप से सोशल मीडिया पर चर्चा गर्म रही.
#MeToo और #TimesUp कैंपेन के तहत भारत में महिलाएं आपबीती बता रही हैं. इसमें अपने साथ हुए दुर्व्यवहारों और प्रताड़ना को सोशल मीडिया पर साझा कर रही हैं. सोशल मीडिया पर ये महिलाएं कुछ सबूत भी पेश कर रही हैं.
इन आरोपों के बाद यह बहस तेज़ हो गई है कि कैसे किसी ऑर्गेनाइजेशन या दफ़्तर के भीतर ही सारी चीज़ें घटित हो रही हैं और किसी को भनक तक नहीं लग रही. यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े कई संस्थानों ने अब कार्रवाई की बात कही है.
फ़िल्मकार विकास बहल पर जिस महिला ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है वो फ़ैंटम फ़िल्म प्रोडक्शन हाउस में काम करती थी. फ़ैंटम के संस्थापक फ़िल्मकार अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटवानी, मधु मंतेना और विकास बहल हैं. को दिए इंटरव्यू में फ़ैंटम प्रोडक्शन हाउस की पूर्व महिलाकर्मी ने विकास बहल पर मई 2015 में गोवा के एक होटल में यौन हमले का आरोप लगाया है.
उस महिला ने कहा है कि यौन हमले की शिकायत उन्होंने अनुराग कश्यप से की थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की. उस महिला ने 2017 में फ़ैंटम को छोड़ दिया था. इस शिकायत की पुष्टि करते हुए अनुराग कश्यप ने हफ़िंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में कहा है कि जो भी हुआ वो ग़लत था.
उन्होंने कहा
फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग बहल की कड़ी आलोचना कर रहे हैं और पीड़ित महिला का समर्थन कर रहे हैं. अलीगढ़ फ़िल्म के निर्देशक हंसल मेहता ने ट्विटर पर पूछा है कि फ़िल्म इंडस्ट्री बहल के ख़िलाफ़ कब खड़ी होगी?
हंसल मेहता ने कहा है कि वो एक पिता होने के नाते इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनकी बेटी को फ़िल्म इंडस्ट्री में आना चाहिए या नहीं.
फ़िल्म 'क्वीन' की अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी विकास बहल पर इस मामले में कई सवाल खड़े किए हैं. कंगना ने यह भी कहा कि 2015 में 'बॉम्बे वेलवेट' फ़िल्म के प्रमोशनल टूर में उन्हें विकास बहल के कारण असहज होना पड़ा था. कंगना ने इंडिया टुडे
इस इंटरव्यू में विकास बहल पर आरोप लगाते हुए कंगना ने कहा, ''विकास बहल शादीशुदा होने के बावजूद अक्सर एक नई पार्टनर से सेक्स करने की शेखी बघारते थे. मैं किसी के चरित्र का आकलन नहीं करती हूं और न ही किसी के वैवाहिक जीवन का मूल्यांकन, लेकिन आदत बीमारी बन जाए तो कहने में कोई हर्ज नहीं है.''
इस बीच, एक महिला ने लोकप्रिय लेखक चेतन भगत से हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट्स को सोशल मीडिया पर साझा किया है. उस महिला के साथ बातचीत में चेतन प्रेम का इज़हार कर रहे हैं और वो ख़ुद के शादीशुदा होने की उपेक्षा कर रहे हैं. इसके ठीक बाद चेतन भगत ने फ़ेसबुक एक पोस्ट लिखकर माफ़ी मांगी. चेतना ने कहा है, ''मुझे मज़बूत जुड़ाव महसूस हो रहा था. शायद मैं मित्रतापूर्ण संबंध को समझ नहीं पाया. मैंने इसे लेकर अपनी पत्नी से भी माफ़ी मांगी है.''
को दिए इंटरव्यू में विकास बहल पर आरोप लगाने वाली महिला का समर्थन किया है.
है, ''हमलोगों ने इस मामले को ठीक से हैंडल नहीं किया. हम पूरी तरह से नाकाम रहे. मैं ख़ुद के सिवाय किसी और पर आरोप नहीं लगा सकता हूं. लेकिन मैं अब इसे ठीक से हैंडल करने को लेकर प्रतिबद्ध हूं. मुझे उस महिला पर पूरा भरोसा है. उस महिला को मेरा पूरा समर्थन है. बहल ने जो भी किया वो डराने वाला है. हमलोग पहले से ही चीज़ों को ठीक करने में लगे हैं. हम इस मामले में जितना कुछ कर सकते हैं, ज़रूर करेंगे.''
अब अनुराग कश्यप ने फ़ैंटम प्रोडक्शन हाउस को ख़त्म करने की घोषणा ट्विटर पर कर दी है. बहल ने क्वीन फ़िल्म महिला सशक्तीकरण को लेकर बनाई थी और उनकी अगली फ़िल्म सुपर-30 आने वाली है.

Monday, October 1, 2018

मशहूर है हिमाचल प्रदेश के मलाणा गांव की हशीश

पश्चिमी कमान के प्रमुख जनरल हरबख़्श सिंह ने लिखा, "युद्ध का सबसे बड़ा फ़ैसला (लाहौर की तरफ़ बढ़ना), सबसे छोटे कद के शख़्स ने लिया." इस पूरी लड़ाई में शास्त्री विपक्षी नेताओं और भारत के सभी लोगों को साथ ले कर चलने की कोशिश कर रहे थे.
उनके बेटे अनिल शास्त्री याद करते हैं, "लड़ाई के दौरान उस समय अमरीका के राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने शास्त्री जी को धमकी दी थी कि अगर आपने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ लड़ाई बंद नहीं की तो हम आपको पीएल 480 के तहत जो लाल गेहूँ भेजते हैं, वो बंद कर देंगे. उस समय हमारे देश में इतना गेहूँ नहीं पैदा होता था. शास्त्री जी को ये बात बहुत चुभी क्योंकि वो एक स्वाभिमानी व्यक्ति थे."
इसके बाद ही शास्त्री ने देश वासियों ने कहा कि हम हफ़्ते में एक समय भोजन नहीं करेंगे. इसकी वजह से अमरीका से आने वाले गेहूँ की आपूर्ति हो जाएगी.
अनिल शास्त्री याद करते हैं, "लेकिन उस अपील से पहले उन्होंने मेरी माँ ललिता शास्त्री से कहा कि क्या आप ऐसा कर सकती हैं कि आज शाम खाना न बने. मैं कल देश वासियों से कल एक वक्त का खाना न खाने की अपील करने जा रहा हूँ. मैं देखना चाहता हूँ कि मेरे बच्चे भूखे रह सकते हैं या नहीं. जब उन्होंने देख लिया कि हम लोग एक वक्त बिना खाने के रह सकते हैं. तब उन्होंने देश वासियों से भी ऐसा करने के लिए कहा."
कच्छ टू ताशकंद किताब लिखने वाले फ़ारूख़ बाजवा के मुताबिक भारत सरकार के दूसरे अंगों में कुछ ने बेहतर काम किया तो कुछ ने मामूली. रक्षा और विदेश मंत्रालय ढ़ंग से चलाए गए लेकिन अगर ये कहा जाए कि दोनों जगह असाधारण काम किया गया, तो ये भी ग़लतबयानी होगी.
भारतीय विदेश मंत्रालय की ख़ास तौर पर इसलिए आलोचना हुई कि लड़ाई के दौरान दुनिया के बहुत कम देश खुलेआम भारत के समर्थन में उतरे.
सैनिक टीकाकारों ने भारत की रणनीति को भी आड़े हाथों लिया. उनका तर्क था कि भारत चाहता तो पूर्वी पाकिस्तान पर हमला कर पाकिस्तान को और अधिक दबाव में डाल सकता था. लेकिन शायद चीन के युद्ध में शामिल होने के डर ने भारत को ऐसा करने से रोक दिया.
जब लड़ाई के अंतिम चरण पर युद्ध विराम करने का दबाव बन रहा था तो प्रधानमंत्री शास्त्री ने सेनाध्यक्ष जनरल चौधरी से पूछा था कि क्या भारत को लड़ाई जारी रखने में फ़ायदा है?
उन्होंने लड़ाई ख़त्म करने की सलाह दी थी क्योंकि उनकी नज़र में भारत का असलाह ख़त्म हो चला था जबकि वास्तविकता ये थी कि भारत के सिर्फ़ 14 फ़ीसदी हथियार ही तब तक इस्तेमाल हुए थे.
लद्दाख के दूर-दराज अंचल में बसे करीब 5 हज़ार ब्रोकपा खुद को दुनिया के आखिरी बचे हुए शुद्ध आर्य मानते हैं. क्या यह वाकई वो जाति है जिसे नाज़ी 'मास्टर रेस' मानते थे? या फिर ये दावा सिर्फ़ मिथक है जिसे बरक़रार रखना इन लोगों के लिए फ़ायदे का सौदा है.
हमारे दौर की सबसे चर्चित युद्धभूमि को करीब से देखने का उत्साह सफर को बोझिल नहीं होने देता.
लेह से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए पहला ख्याल करगिल का ही आता है लेकिन बीबीसी की टीम इस सड़क पर कुछ और ढूंढने निकली थी.
करीब 4 घंटे तक लेह से बटालिक तक का रास्ता बिल्कुल हाइवे जैसा है. इसके बाद सड़क तंग होकर सिंधु नदी का किनारा पकड़ लेती है.
कहीं कच्चे, कहीं पक्के रास्ते पर तकरीबन दो घंटे और चलने के बाद आप गारकोन गांव पहुंचते हैं.
गांव से ठीक पहले बियामा में आपका ध्यान सबसे पहले 2015 में आई बाढ़ में डूबे घरों की ओर जाता है.
नंगे, पथरीले पहाड़ों पर हरे पैबंद जैसे खेत स्थानीय लोगों की मेहनत भरी ज़िंदगी की गवाही देते हैं लेकिन इस जगह की सबसे बड़ी ख़ासियत खुद ये लोग हैं.
गारकोन के बच्चे, बूढ़े और जवान अब शहरी दिखने वाले लोगों को देखकर हैरान नहीं होते. वे अच्छी तरह जानते हैं कौन सी जिज्ञासा उन्हें यहां खींचकर लाई है.
गांव के किसी भी शख्स से 5 मिनट की बातचीत भी आपको इस सवाल तक ले ही आती है. चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रही सोनम ल्हामो बताती हैं कि शुद्ध आर्य होने की बात उनके समुदाय में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है.
वो कहती हैं, "आपने पढ़ा होगा आर्य लंबे और गोरे होते थे. आप यहां की आबादी में भी यही बात देख सकते हैं. हम लोग भी प्रकृति की पूजा करते हैं. हम अपने कल्चर को ही अपने प्योर आर्यन होने का सबसे बड़ा सुबूत मानते हैं."
ये देखा जा सकता है कि बियामा, गारकोन, दारचिक, दाह और हानू के लोगों की शक्लें बाकी लद्दाखियों के मंगोल नैन-नक्श से अलग हैं.
ब्रोकपा नाम उन्हें लद्दाख की बाकी आबादी की ओर से ही मिला है. स्थानीय भाषा में इसका मतलब घुमंतु होता है.
बौद्ध होने के बावजूद ब्रोकपा देवी-देवताओं में यकीन करते हैं और आग जैसी कुदरती ताकतों को पूजते हैं. बलि देने की प्रथा भी अब तक ज़िंदा है हालांकि आज की पीढ़ी में उसका विरोध होने लगा है.
आग और प्रकृति की दूसरी ताकतों को पूजने और बलि देने का ज़िक्र वेदों में भी मिलता है.
हालांकि, ब्रोकपा संस्कृति में बकरियों को गायों से ज़्यादा ऊंचा दर्जा हासिल है. बदलते वक्त के साथ कहीं-कहीं अब गोवंश नज़र आने लगा है लेकिन बकरी का दूध और घी अब भी इन लोगों की पहली पसंद है.
ज़ाहिर है, बाकी लद्दाखी संस्कृति से अलग होना ही उनका शुद्ध आर्य का सुबूत नहीं हो सकता.
इसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले स्वांग गैलसन करगिल के कॉलेज में पढ़ाते हैं. उनकी दिलचस्पी अपने इतिहास की तह तक जाने में है.
वो बताते हैं, 'कई इतिहासकारों ने इस बात के संकेत दिए हैं. मसलन, जर्मन विशेषज्ञ एएच फ्रैंकी ने अपनी किताब 'द हिस्ट्री ऑफ वेस्टर्न तिब्बत' में हमारी आबादी को आर्यन स्टॉक का नाम दिया है.'
हाल ही में अपनी भाषा का शब्दकोश छपवा चुके गैलसन संस्कृत के साथ उनकी भाषा की समानताएं भी गिनवाते हैं.
उनके मुताबिक, 'बाकी लद्दाखी भाषाओं से इतर हमारी ज़ुबान में संस्कृत के कई शब्द मिलते हैं.
उदाहरण के लिए घोड़े के लिए अश्व, सूरज के लिए सूर्य आदि. यही बात हम अंकों के बारे में भी कह सकते हैं.'
गैलसन के मुताबिक एक मिथक ये भी है कि उनका समुदाय सम्राट सिकंदर के सैनिकों का वशंज हैं हालांकि पाकिस्तान की कलाश जाति, हिमाचल प्रदेश में मलाणा और बड़ा भंगाल इलाके के लोग भी कुछ ऐसा ही दावा करते हैं.रोकपा लोकगीतों में इस बात का ज़िक्र मिलता है कि उनके पूर्वज करीब सातवीं सदी में गिलगित-बलतिस्तान से आकर बटालिक के आसपास के इलाकों में बसे होंगे.
उनका सबसे बड़ा त्योहार अक्टूबर में फसल कटाई के वक्त मनाया जाने वाला बोनोना है.
हर ब्रोकपा गांव बारी-बारी से इसे आयोजित करता है. एक साल पाकिस्तान की ओर बसे उनके गांव गनोक के लिए भी छोड़ा जाता है.
हालांकि, ये कहना मुश्किल है कि उस ओर इस परंपरा को अब भी निभाया जाता है या नहीं.